आज फिर भटका मन मेरा, आज फिर किसी ने आवाज़ दी।
कृष्ण ने झकझोर उठाया, आज फिर कृष्ण ने याद की ॥
जब जब घना कोहरा जिंदगी के गिर्द, मन को बेचैन करता है।
कृष्ण तू सहज ही आकर मुझे फिर-फिर संभाल लेता है ॥
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श्री राधारानी ब्रह्म की अनिर्वचनिये अभिन्न सहचरी - शक्ति है। बिन राधा के यह ब्रह्माण्ड ब्रह्म की किसी भी अभिव्यक्ति को अनुभव नही कर सकता। सृष्टी का होना ही राधा का होना है। राधा का होना ही कृष्ण का होना है। और कृष्ण का होना ही आनंद का होना है। इस जीवन के होने के आंनद को बांटना ही इस ब्लॉग का उद्देश्य है। राधा रानी कृपा करें !
2 comments:
It made me happy reading this :).
Thank you
very nice.
Love the thought.
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