राधा नाम साधारण है। 'रा' और 'धा' । मगर 'रा' माने क्या ? वही 'रा' जो 'राम' में है । जैसे राम सहज हैं, राधा भी सहज है। और राम का 'र' मुर्धन्यता का प्रतीक है। जो कहीं ऊपर से आता है। जो निचे का नही है। जीसे उच्चारण करने में जीह्वा को ऊपर तालू की तरफ जाना तो पड़ता है पर वह छू नही पाती। वैसे ही जैसे हर जीव जीवन के सम्पूर्णता की तलाश में राम के चरीत तक जाने के लीये प्रयास तो करता है मगर उसे छू नही पाता। और राम में 'म' भी है। 'म' मतलब मन । 'म' मतलब मसित्ष्क। 'म' का उचरण मन में गूंजता है। मसित्ष्क में गूंजता है। मतलब की राम उस परे से मन तक उतरते हैं। 'रा' 'म' माने आकाश के तल से मन तक।
और राधा ? 'रा' से 'धा' तक। धा जैसे 'धरती', 'dharitri'। जैसे ध आवाज है। बील्कुल गले के निचे से। वैसे ही 'धा' है बील्कुल निचे से। जमीं से । तो 'राधा' है आकाश से जमीं तक। सम्पूर्ण। और चुंकी सम्पूर्ण है इसिल्ये साधारण है। क्योंकी असाधारण तो किसी एक खास अंग के विशेष होने से होता है । और इसिल्ये असाधारण में समस्या भी होती है। हमारी राधा साधारण है। और इसिल्ये विशेष है। जय राधा।
Wednesday, December 12, 2007
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