Monday, June 2, 2008

हरे कृष्ण

यह जो मेरी कृष्ण की इबादत है,

यह उसी कृष्ण की मुझ पे इनायत है।

वरना यह ज़िंदगी क्या है

पैदा होने से मरने तक की कवायद है।

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