यह जो मेरी कृष्ण की इबादत है,
यह उसी कृष्ण की मुझ पे इनायत है।
वरना यह ज़िंदगी क्या है
पैदा होने से मरने तक की कवायद है।
श्री राधारानी ब्रह्म की अनिर्वचनिये अभिन्न सहचरी - शक्ति है। बिन राधा के यह ब्रह्माण्ड ब्रह्म की किसी भी अभिव्यक्ति को अनुभव नही कर सकता। सृष्टी का होना ही राधा का होना है। राधा का होना ही कृष्ण का होना है। और कृष्ण का होना ही आनंद का होना है। इस जीवन के होने के आंनद को बांटना ही इस ब्लॉग का उद्देश्य है। राधा रानी कृपा करें !
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